Sunday, August 18, 2013

श्रीलंका संसद में आज भी लगी है महाराज विभिषण की मूर्ति





हैरानीवाली बात है कि श्रीलंका के नाम का खयाल आते ही हमारे जेहन में बुराईयों के प्रतीक के रुप में रावण का नाम सबसे पहले आता है लेकिन कम लोग ही जानते होंगे कि श्रीलंका में आज भी रावण को वहां के लोग बड़े ही आदर व सममान से लिया करते हैं। यही नहीं रावण की लंका को समूल नष्ट करवाने में रावण के सगे भाई विभीषण ने मुखय भूमिका निभाई थी व यह नाम याद आते ही हमारे मन में एक ही वाक्य निकलता है कि घ्र का भेदी लंका ढाहे पर जानकर आश्चर्य होता है कि श्रीलंका के नेशनल असेंबली के मुखय कक्ष में आज भी रावण के साथ साथ रावण की मौत के बाद लंका के राजा बने महाराज विभीषण का आदमकद मूर्ति लगाई गई है। श्रीलंका के रामायण रिसर्च कमेटी के चेयरमैन अशोक कैंथ जो इन दिनों भारत के दौरे पर आए हैं ने दैनिक भास्कर के साथ इन विषयों पर खुलकर बातचीत की।


माता सीता ही सबसे पहले लंका विमान से पहुंची थी
अशोक कैंथ ने बताया कि श्रीलंका में आज भी वहां बौद्घ धर्म को मानने वाले बहुसंखयक होने के बावजूद माता सीता को बड़े ही आदर से लोग नाम लेते हैं। यही नहीं श्रीलंका के लोगों के साथ साथ वहां की सरकारे भी मानती है कि माता सीता ही वह शखस थी जो सबसे पहले विमान(पुष्पक) से भारत से श्रीलंका पहुंची थी जिसका पायलट महाराज रावण थे। यही कारण है कि आज भी श्रीलंका के सबसे पहले एयरलाइंस का नाम सीता एयरलाईन्स के नाम से ही जाना जाता है।


रावण के हवाई अड्डे की तलाश भी हो चुकी है पूरी
श्रीलंका के अंदर जिस सोने की लंका में दुनिया भर के सप्तद्वीपों का राजा रावण रहता था, वह तो डूब चुकी है लेकिन श्री लंका का 60 फीसदी हिस्सा अभी भी अभी भी रावण की स्मृतियों को ताजा कर देता है। यहां खोजे गए स्थान कम से कम इतना तो प्रमाणित कर ही रहे हैं कि रामायण काल से जुड़ी लंका वास्तव में श्री लंका ही है। श्री लंका में रामायण काल से जुड़े अनेक स्थलों को खोजा जा रहा है। श्री रामायण रिसर्च कमेटी द्वारा पिछले चार साल में खोजे गए 50 के करीब स्थलों में रावण के हवाई अड्डे भी मिले हैं। श्री रामायण रिसर्च कमेटी श्रीलंका द्वारा खोजी गई अशोक वाटिका से लेकर पाताल लोक के साथ-साथ एक अहम स्थान ऐसा भी है जिसे सुनकर एक बार तो विश्वास करना भी मुश्किल हो जाता है। जी हां वह स्थल हैं रावण के हवाई अड्डे। लंका नगरी में रावण के पांच हवाई अड्डे होने का दावा किया जा रहा है।


हनुमान जी ने उसानगौड़ा हवाई अड्डे को कर दिया था नष्ट
श्रीलंका के लोगों का विश्वास है कि हनुमान जी ने जब लंका दहन किया तो रावण के पांच हवाई अड्डों में से एक महत्वपूर्ण स्थान उसानगौड़ा हवाई अड्डे को भी पूरी तरह से नष्ट कर दिया था। उसानगौड़ा वह हवाई अड्डा है जिसे स्वंय राजा रावण निजी तौर पर प्रयोग करता था। इस हवाई अड्डे का रन वे सुर्ख लाल रंग का दिखता है। रन-वे के आसपास की जमीन कहीं काली तो कहीं हरी घास युक्त बनी हुई है। कुछ जगह पर जले हुए पत्थर भी एक दूसरे से जुड़े हुए दिखते हैं। अशोक कैंथ ने बताया कि इस पर अभी और भी खोज जारी है फिर भी 10-10 किलोमीटर लंबाई व चौड़ाई तक फैले कच्चे परंतु कठोर जमीन पर बने रन-वे सरीखे मैदान देख कर तो ऐसा लगता है कि यहां रावण की प्रजा के लिए हवाई अड्डे जरुर रहे होंगे। ऐसा प्रतीत होता है जैसे आज की नई तकनीक भी इतनी शानदार व सख्त हवाई पट्टी नहीं बना सकती जितनी ठोस यह हवाई पट्टी बनी है। यह हवाई पट्टी आसपास की भूमि से बिल्कुल अलग है। जिस जगह पर यह हवाई पट्टी है उस स्थान पर कोई भी पेड़ नहीं है। श्री रामायण रिसर्च कमेटी के चीफ रिसर्चर अशोक कैंथ ने बताया कि रिसर्च में यह बात भी सामने आई है कि उस समय के हवाई जहाज पैट्रोल से नहीं मरकरी से चलाए जाते थे।
श्रीलंका में कहां- कहां थे रावण के हवाई अड्डे
श्री रामायण रिसर्च कमेटी श्री लंका द्वारा अशोक कैंथ के नेतृत्व में लंका में चार स्थानों पर रावण के हवाई अड्डों की खोज की गई है।


1. उसानगौड़ा
2. गुरुलोपोथा(इस स्थान को एयरक्राफट रिपेयर सैंटर के तौर पर खोजा गया है)
3. -तोतूपोलाकदा
4-. वारियापोला में दो हवाई रन वे।
भारत सरकार चाहे तो मिल सकती है पर्यटन को बढ़ावा
श्री रामायण रिसर्च कमेटी के प्रमुख रिसर्चर अशोक कैंथ ने कहा कि दोनों देशों (श्री लंका व भारत)की सरकारें अगर इस पर मिलजुल कर काम करें तो इन हवाई अड्डों को एक ऐतिहासिक व पर्यटन स्थलों के तौर पर पूरी तरह से विकसित किया सकता है। यही नहीं श्रीलंका में रामायण काल से जुड़ी सभी प्रमुख स्थलों जो अब विकसित हो रही है में सहयोग देनी चाहिए।

No comments:

Blog Archive

INTRODUCTION

My photo
INDIA-RUSSIA, India
Researcher of Yog-Tantra with the help of Mercury. Working since 1988 in this field.Have own library n a good collection of mysterious things. you can send me e-mail at alon291@yahoo.com Занимаюсь изучением Тантра,йоги с помощью Меркурий. В этой области работаю с 1988 года. За это время собрал внушительную библиотеку и коллекцию магических вещей. Всегда рад общению: alon291@yahoo.com